विचारों का संकलन जरूरी है। आज विचारों का भाव बहुत नीचे जा रहा है। समाज में वह भाव लुप्त सा हो गया है। हमें आज के परिवेश में यह देखना होगा कि हम चाहते क्या हैं और कर क्या रहे हैं। समाज में आने वाले नये बच्चों को हम किस रूप में देखना चाहते हैं? उनका स्वरूप जन्म स्थान और वातावरण के अनुसार बनता है अतः समाज के लिए कुछ छोड़े नहीं तो फिर बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होय। वाली कहावत रह जायगी। छोटा स्वार्थ बड़े लाभ को नष्ट करता है।