Monday, February 18, 2019

पुलवामा संहार

चौदह फरवरी को जिस तरह से पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरफीएफ के जवानों पर पीठ पीछे का कायराना हमला किया वह बहुत ज्यादा हृदय विदारक रहा। देश में उबाल है। चैनल और सोशल मीडिया में ज्यादा से ज्यादा विचारों का ज्वार आ गया। मानवता को शर्मसार करने वाला हमला हर भारतवासी को आंदोलित कर रहा है। सभी पाकिस्तान को नेस्तनाबूद कर देने की तमन्नाओं से भरे हैं। मीडिया लगातार शहीद और उनके परिवार के मनोभावों से अवगत करा रहा है। परिवार के आँसुओं में देश भक्त देशवासियों के आँसू मिल गये हैं। सभी का करेगा मुँह को आ रहा है। सभी की आशाएँ पाकिस्तान से बदला लेना है।
प्रधानमंत्री जी भी जनभावनाओं के साथ उद्वेलित व उद्विग्न हैं। वह भी वहीं चाहते हैं जो देशवासी चाहते हैं। परंतु पद और राष्ट्र प्रमुख होने की बाधाएँ और बड़ी जिम्मेदारियां भी हैं। चाहकर भी तुरंत वह न कर पाना जो चाहत है। पर मानवीय भावों पर वह हमसे अलग नहीं हैं। राष्ट्रीय रूप से जब कोई कदम उठाना होता है तो न तो परिणाम से पहले उसकी जानकारी साझा की जा सकती है और न ही बिना विचारे भिड़ा जा सकता है। अतः मीडिया जिम्मेदार भूमिका अदा करें और समझें कि इस समय क्या जरूरी है। आज आतंकवादी कार्रवाई में हालाँकि तीन आतंकवादी मारे गये परंतु साथ ही हमारा एक मेजर और तीन जवान फिर शहीद हो गये। दरअसल पाकिस्तान के छद्म और पाखंड़ी युद्ध में हमारे बीच के जयचंद बहुत बड़ा रोल निभा रहे हैं। ऐसे में शत्रु का मुकाबला बहुत दुष्कर व दुरूह हो जाता है।
यह तो तय है कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजाय बिना चैन से सोने वाले नहीं हैं फिर भी यह सब काल के गर्भ में छिपा है और इसे छिपा रहने दिया जाय तो अच्छा है। कहते हैं गरम गरम भात खाने से जीभ जल जाती है और स्वाद भी नहीं आता। इसलिए संजीदा देशप्रेमियों धैर्य और विवेक के साथ प्रधानमंत्री को काम करने का अवसर दो। तभी हमें निश्चित सफलता मिलेगी की और कायर से मर्दाना बदला भी पूरा होगा।
पंडित राकेश मालवीय