जल संकट पर मेरी राय
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जल संकट आजकल प्रमुख मुद्दा है। लोग कहते हैं की तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए होगा। हालांकि इस समय वर्षा का पानी बहुत अधिक मात्रा में है। हम तमाम तरह की मूर्तियां बनवा रहे हैं। करोड़ों, अरबों रुपये खर्च हो रहे हैं।यदि हम करोड़ों रुपए तालाब या बावड़िया बनवाने में लगा देते जल संग्रह प्रचुर मात्रा में हो जाता। हमारा जल संकट भी काफी कम हो जाता। हम पानी को नदियों और नालों के माध्यम से समुद्र में पुनः न डालें बल्कि उसकी संरक्षा करें। जिससे हमारे समुदाय के लोगों की प्यास भी बुझ सके। मेरे ख्याल से जल संग्रहण एक अच्छा उपाय होगा। हम जल संकट से बच भी सकते हैं और प्रकृति के द्वारा जल बचा भी सकते हैं। इस तरह जल संग्रह संभव हो सकता है। यदि मन में सत्य निष्ठा के साथ भावना जागृत हो। इसमें न केवल सरकार बल्कि प्राइवेट संस्थाएं भी अपना योगदान दे सकती हैं। अन्यथा बोतलों में बंद पानी भी सिमट जाएगा और तब तो निश्चित ही जल के लिए विश्व युद्ध हो सकता है। इसे कोई रोक भी ना पाएगा क्योंकि जल ही जीवन है। हमारे पुराने कवि रहीमदास ने कहा भी है---
रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरे मोती मानुष चून ।।
आओ हम सब मिलकर प्रकृति द्वारा प्रदत्त जल का संग्रहण करें और अपनी तथा अपने धरती की प्यास बुझाए। अन्यथा हम चाह कर भी सुरक्षित न रह पाएंगे क्यों कि जल ही जीवन है।
पंडित राकेश मालवीय
Wednesday, July 10, 2019
जल संरक्षण
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