Thursday, June 3, 2021

क्यों मानै उनकी बातें?

आलेख
क्यों माने उनकी बातें?

वे इस संकट के दौर में हमसे सौदा कर रहे हैं। कहते हैं हमारी दवाई भी लो और इससे होने वाले परिणाम या दुष्परिणाम को भी भुगतो, आखिर क्यों?
विश्व की कुछ जानी मानी दवा कंपनियां भारत से सौदा कर रही हैं कि हमारी दवा ले लो और अपने नागरिकों पर अपनी जिम्मेवारी पर प्रयोग करो। यानी हमारे देश के लोगों की उनकी नजर में कोई कीमत नहीं। बल्कि उन्हें उनकी कमाई का पूरा भाग मिलना चाहिए बाकी दुनिया जाए भाड़ में। क्या होता जा रहा है ऐसे भयंकर महामारी के दौर में लोगों की मानसिकता को। उनके भीतर के मानवीय तत्व लुप्त हो गए हैं अथवा जन्मजात ही कुछ नहीं है उनके भीतर। जिस धन की पोटली का वैभव लेकर इस संसार में और मुक्त होना चाहते हैं। क्या यही उनके जीवन की सच्चाई है?
हमारे यहां कहा जाता है कि 84 लाख योनियों के बाद मनुष्य का शरीर मिलता है। तो क्या यह शरीर सिर्फ वैभव, लालसा, भोग, काम और लोभ के लिए ही है। किसी भी संसाधन के उपभोग और उपयोग का एक सीमित अंश है। जिसे मनुष्य कर सकता है। न तो उससे ज्यादा न ही उससे कम। इसका मतलब बाकी का हिस्सा सिर्फ और सिर्फ बर्बाद होने के लिए होता है अथवा अपने आप को ही नरक की ओर ले जाने के लिए होता है। क्यों करते हैं लोग? विश्व के तमाम धन पशुओं को शायद यह सत्य समझ नहीं आएगा। परंतु मानवीय वैभव को समझने वाले लोग निश्चित तौर पर इस पर विचार करेंगे कि कैसे इस तरह के लोगों को हावी ही न होने दें।
चिंतन का समय है। हमारी सरकार ऐसा कर भी रही है, परंतु कुछ धना लोलुप बुद्धिजीवी इस तरह के लोगों की वकालत करते हैं। और अपने समाज में जहर बोने का काम करते हैं। उनसे यह मतलब नहीं है कि कोई जिए या मरे। उन्हें सिर्फ और सिर्फ एक निश्चित मानसिकता के अनुसार ही व्याख्या करनी होती है। क्यों माने हम इनकी बात?
पंडित राकेश मालवीय मुस्कान
प्रयागराज 16

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