Tuesday, November 13, 2018

पंड़ित जवाहरलाल नेहरू

काल और परिस्थिति कब क्या कर जाये कुछ कहा नहीं जा सकता। इसीलिए कहा जाता है कि आदमी नहीं समय बलवान होता है।
एक समय था जब पंड़ित जवाहरलाल नेहरू की तूती बोलती थी। देश के नवनिर्माता कहे जाते थे। कल उनकी जयंती है। बाल दिवस के रूप में हमेशा मनाई गई। परंतु आज का समय और है। देश के प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी के हैं और वह कांग्रेस से तथा उनके लोगों से सरोकार नहीं रखना चाहते। इसीलिए जब भी इंदिरा गाँधी या जवाहरलाल नेहरू की जयंती होती है तो वह देश से पलायन कर जाते हैं। व्यक्ति नहीं, पार्टी नहीं वरन् उस पद के नाते उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करना देश के प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है।
नेहरू जी करीब सोलह वर्ष से ऊपर देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। मन से या बेमन से देश को दिशा दी है। आज उनके कार्यों को पूरी तरह नकार देना भलमनसाहत नहीं है। और यह परम्परा न तो देश हित की है और न ही व्यक्ति हित की। वरन यह एक आदर्श परम्परा के लिए कुठाराघात है। राष्ट्र धर्म के नवजागरण को जिन्दा करने वाले लोग ऐसा कैसे कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने तो उन्हें भी उच्च स्थान दिलाया जो उन दिनों उपेक्षित थे। फिर वह सहज स्वाभाविक वृत्ति क्यों भूल बैठे। जो वसुधैव कुटुम्बकम् को मानने वाले हैं वह अपने ही परिवार के साथ इतनी नफरत कैसे कर सकते हैं।
नेहरू जी ने परिस्थितियों पर राज किया है। यह सच है। आपने इसका आइना सबको दिखाया भी। नेहरू की उपेक्षा नहीं समालोचना होनी चाहिए। क्योंकि समय एक सा नहीं रहता। और समय की गति कोई नहीं समझ पाया। लोकतंत्र में सब समय एक सा हो भी नहीं सकता। समय और जनमत का कोई भरोसा नहीं। मैं नहीं चाहता समय की गर्द में किसी को पूरी तरह दबा दिया जाय।
वर्तमान प्रधानमंत्री दिल से देश का विकास कर रहे हैं। कल उनकी भी उपेक्षा हो। यह ठीक नहीं होगा। अतः कुछ मामलों पार्टी से ऊपर उठकर सोचना व करना चाहिए।
देश के सच्चे नागरिक होने के नाते देश के प्रथम प्रधानमंत्री को विनम्र श्रद्धाञ्जलि और बालदिवस की बधाई।

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